GI टैग प्राप्त पारंपरिक शिल्प जनजातीय हस्तशिल्प एवं लोक कलाएं

बस्तर लौह शिल्प (लोहार व अगरिया कला)

Bastar Wrought Iron Craft (GI Tagged)

विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व

"अगरिया व लोहार जनजाति द्वारा बेकार पड़े लोहे को भट्ठी में लाल-गर्म कर हथौड़ों से पीट-पीटकर बनाई जाने वाली अद्भुत आकृतियां, दीप स्तंभ और जनजातीय आभूषण।"

बस्तर का लौह शिल्प अपनी सादगी और प्राचीन ज्यामितीय रेखाओं के कारण आधुनिक इंटीरियर डिजाइनरों और कला प्रेमियों की पहली पसंद है।

प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण

  • GI Tag प्राप्त शिल्प
  • बिना वेल्डिंग के केवल पीट-पीटकर जोड़ना
  • दीया, हिरण, पेड़, सैनिक और जनजातीय जीवन की आकृतियां
  • पर्यावरण हितैषी रीसाइकिल्ड लोहा और आधुनिक इंटीरियर में मांग

पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया

आदिवासी भट्ठी में कोयले की आंच पर लोहे को तपाया जाता है और सिर्फ छेनी-हथौड़े से उसे सुंदर रूप दिया जाता है।

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

अगरिया जनजाति भारत की प्राचीनतम लौह प्रगालक (Iron Smelting) जनजाति है, जिसने भारत को लौह युग में प्रवेश कराया था।

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