आदिवासी संस्कृति का सबसे बड़ा हाट प्रसिद्ध सांस्कृतिक मेले एवं महोत्सव

बस्तर मड़ई मेला (आदिवासी देव मिलन उत्सव)

Bastar Madai Mela

विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व

"बस्तर अंचल का सर्वाधिक रंगारंग और पारंपरिक मेला। दर्जनों गांवों के ग्रामीण अपने-अपने देवी-देवताओं के आंगा, छत्र और लाट लेकर एक स्थान पर एकत्र होते हैं।"

मड़ई आदिवासी समाज के लिए रिश्तेदारों से मिलने, नए रिश्ते तय करने और वर्षभर की आवश्यकता की वस्तुएं हाट से खरीदने का प्रमुख सामाजिक मंच है।

प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण

  • नारायणपुर की ऐतिहासिक मड़ई (सबसे बड़ी मड़ई)
  • काष्ठ निर्मित आंगा देवों की परिक्रमा व मिलन
  • पारंपरिक आदिवासी हाट, धनुष-बाण व औजारों की बिक्री
  • मांदरी, गौर नृत्य और रातभर चलने वाले लोक उत्सव

पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया

स्थानीय सिरहा (पुजारी) पर देवी की सवारी आती है और देव आज्ञा से मड़ई शुरू होती है। रातभर मुर्गों की लड़ाई और नृत्य का आनंद लिया जाता है।

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

मड़ई का इतिहास रियासत काल से जुड़ा है जब राजा के निमंत्रण पर सभी परगना के देवी-देवता एक स्थान पर हाजिरी लगाने आते थे।

क्या आप इसके बारे में और जानते हैं?

यदि आपके पास इस लोक पर्व या कला से जुड़ी कोई दुर्लभ रस्म, गीत या फोटो है तो हमारे साथ साझा करें।

जानकारी भेजें