विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व
"मिट्टी के घड़े (मटका), बांस के सूप और धनुष की डोरी को मिलाकर बजाया जाने वाला बस्तर का अनूठा वाद्य। यह केवल वाद्य नहीं बल्कि देवी जागृति का अनुष्ठानिक साधन है।"
धनकुल गीतों में सृष्टि की उत्पत्ति, पांडवों की कथा और स्थानीय देवियों के पराक्रम का विशद वर्णन होता है। यह बस्तर की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर है।
प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण
- घड़ा, सूप और धनुष की अद्भुत यांत्रिक जुगलबंदी
- केवल महिलाओं (गुरूमाय) द्वारा अनुष्ठानिक वादन
- आठ-आठ दिनों तक चलने वाले संगीतमय धनकुल गीत
- तीजा जगार, लक्ष्मी जगार व बाली जगार की गाथाएं
पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया
घड़े को उल्टा रखकर उस पर सूप टिकाया जाता है और धनुष के एक सिरे को घड़े पर रखकर डोरी को बांस की कमानी से रगड़ा जाता है जिससे गहरी अनुनादी ध्वनि उत्पन्न होती है।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि
धनकुल बस्तर की प्राचीन मातृसत्तात्मक संस्कृति की अनूठी देन है, जिसमें सृष्टि की उत्पत्ति की कथाएं गाई जाती हैं।
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33 जिला दर्शन
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