GI टैग प्राप्त विश्व धरोहर जनजातीय हस्तशिल्प एवं लोक कलाएं

ढोकरा / बेल मेटल शिल्प (हड़प्पा कालीन लॉस्ट-वैक्स कला)

Dhokra Bell Metal Craft (GI Tagged)

विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व

"4000 वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता की लॉस्ट वैक्स (खोई मोम) तकनीक से कांस्य और पीतल की अद्वितीय कलाकृतियों का निर्माण। घड़वा शिल्पकार इसमें सिद्धहस्त हैं।"

कोंडागांव को शिल्पग्राम कहा जाता है। स्वर्गीय जयदेव बघेल जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं ने ढोकरा कला को दुनिया भर के कला दीर्घाओं में स्थापित किया।

प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण

  • भौगोलिक उपदर्शन (GI Tag) प्राप्त शिल्प
  • मधुमक्खी के मोम के बारीक धागों से सांचे का निर्माण
  • प्रत्येक कलाकृति अद्वितीय (एक सांचे से केवल एक पीस)
  • विदेशों में अत्यधिक मांग और वैश्विक कला दीर्घाओं में प्रदर्शन

पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया

पहले मिट्टी का ढांचा बनता है, फिर मधुमक्खी के मोम से आकृतियां उकेरी जाती हैं। फिर चिकनी मिट्टी का लेप लगाकर भट्टी में तपाया जाता है जिससे मोम पिघलकर निकल जाता है और खाली जगह में पिघला पीतल भरा जाता है।

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

मोहनजोदड़ो की प्रसिद्ध "नर्तकी की कांस्य मूर्ति" (Dancing Girl) इसी लॉस्ट वैक्स तकनीक से बनी थी, जिसे बस्तर के कलाकारों ने आज भी जीवित रखा है।

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