लाखों श्रद्धालुओं का महासमागम प्रसिद्ध सांस्कृतिक मेले एवं महोत्सव

गिरौदपुरी धाम मेला (सतनाम पंथ का तीर्थ)

Girodhpuri Dham Annual Fair

विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व

"संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी की पावन जन्मभूमि और तपोभूमि गिरौदपुरी में आयोजित होने वाला तीन दिवसीय विशाल मेला। 77 मीटर ऊंचा देश का सबसे बड़ा जैतखाम आकर्षण का केंद्र है।"

गिरौदपुरी धाम के मेले में प्रतिवर्ष 15 से 20 लाख श्रद्धालु भाग लेते हैं। यह मेला सामाजिक समरसता और अहिंसा का अनुपम संदेश देता है।

प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण

  • 77 मीटर (243 फीट) ऊंचा विश्वप्रसिद्ध जैतखाम (कुतुबमीनार से भी ऊंचा)
  • छाता पहाड़, औरा-धौरा वृक्ष व अमृतकुंड तपोभूमि दर्शन
  • लाखों श्वेत वस्त्रधारी सतनामियों का पावन संगम
  • अखंड पंथी नृत्य, गुरुवाणी गायन एवं विचार गोष्ठी

पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया

जैतखाम पर सफेद पालो (श्वेत ध्वज) चढ़ाया जाता है। श्रद्धालु नतमस्तक होकर "सतनाम" का जाप करते हैं और गुरु घासीदास के शांति-सद्भाव के संदेश को दोहराते हैं।

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

बाबा गुरु घासीदास का जन्म 18 दिसंबर 1756 को गिरौदपुरी में हुआ था। उन्होंने इसी धरती से छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध क्रांति का शंखनाद किया था।

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