विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व
"आदिवासी महिलाओं के शरीर पर स्थायी रेखाओं व प्रतीकों को गोदने की प्राचीन परंपरा, जिसे अब कलाकारों ने सूती वस्त्रों, साड़ियों और कैनवास पेंटिंग पर अमर कर दिया है।"
वर्तमान में सरगुजा की महिलाओं ने गोदना को साड़ियों और दुपट्टों पर उकेरकर एक नया कुटीर उद्योग खड़ा किया है, जिसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय फैशन शोज़ में प्रदर्शित किया जाता है।
प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण
- काजल व वनस्पति अर्क के प्राकृतिक रंगों का प्रयोग
- ज्यामितीय आकृतियां, मोर, पेड़ और प्रकृति प्रतीक
- शांतिबाई जैसी लोक कलाकारों द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार
- साड़ियों और दुपट्टों पर आधुनिक फैशन ट्रेंड
पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया
पारंपरिक रूप से ओझा व बंजारा महिलाओं द्वारा सुइयों से त्वचा पर आकृतियां बनाई जाती थीं, जो आभूषणों का विकल्प और मृत्यु के बाद भी साथ जाने वाला गहना मानी जाती थीं।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि
प्राचीन काल में आभूषण हर किसी के पास नहीं होते थे, इसलिए शरीर को सुशोभित करने के लिए गोदना का आविष्कार हुआ। इसे सामाजिक पहचान और सुरक्षा का प्रतीक भी माना जाता था।
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