छत्तीसगढ़ का स्वर्णिम रेशम जनजातीय हस्तशिल्प एवं लोक कलाएं

कोसा सिल्क एवं हथकरघा (तसर रेशम वस्त्र)

Kosa Tussar Silk Handloom

विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व

"शहतूत व अर्जुन वृक्षों पर पलने वाले कोकून (रेशम कीट) से काता जाने वाला प्राकृतिक तसर रेशम। जांजगीर-चांपा के देवांगन बुनकरों की पीढ़ियों पुरानी कला।"

छत्तीसगढ़ का कोसा रेशम अपनी सांस लेने वाली बनावट और सादगीपूर्ण चमक के लिए भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, यूरोप और जापान में भी अत्यधिक सराहा जाता है।

प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण

  • प्राकृतिक सुनहरी चमक, टिकाऊपन व दीर्घायु
  • गर्मियों में ठंडा और सर्दियों में गर्म रहने का गुण
  • शुद्ध प्राकृतिक व ऑर्गेनिक धागे से निर्मित
  • चांपा की कोसा साड़ियों का विदेशों में निर्यात

पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया

कोकून को उबालकर धागा निकाला जाता है और फिर पारंपरिक हथकरघे (Pit Loom) पर सूत और रेशम के ताने-बाने से खूबसूरत साड़ियां व कुर्ते तैयार किए जाते हैं।

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

छत्तीसगढ़ का चांपा क्षेत्र शताब्दियों से रेशम व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां के वस्त्र राजा-महाराजाओं के दरबार में पहने जाते थे।

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