छत्तीसगढ़ का मुख्य ताल वाद्य पारंपरिक लोक वाद्ययंत्र

मांदर (माटी का ढोल - लोक नृत्यों की आत्मा)

Mandar (Clay Cylindrical Drum)

विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व

"पकी हुई मिट्टी के बेलनाकार ढांचे पर चमड़ा मढ़कर बनाया जाने वाला वाद्ययंत्र। करमा, पंथी और सरहुल नृत्य मांदर की थाप के बिना संभव ही नहीं हैं।"

मांदर की ध्वनि कई किलोमीटर दूर तक घने जंगलों में गूंजती है और दूर-दराज के पहाड़ों पर रहने वाले ग्रामीणों को उत्सव का निमंत्रण देती है।

प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण

  • पकी मिट्टी के ढांचे की विशिष्ट भारी व गूंजदार ध्वनि
  • दोनों सिरों पर अलग-अलग ताल वादन की तकनीक
  • गले में लाल फीता डालकर नर्तक स्वयं बजाते हुए नाचते हैं
  • आदिवासी संस्कृति और उत्सवों की धड़कन

पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया

मांदर को देवता का रूप माना जाता है। नृत्य से पहले मांदर पर सिंदूर लगाकर अगरबत्ती दिखाई जाती है।

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

प्राचीन काल से मिट्टी और पशु चर्म के प्राकृतिक संसाधनों से इस वाद्य का आविष्कार हुआ, जो आज भी अपरिवर्तित रूप में विद्यमान है।

क्या आप इसके बारे में और जानते हैं?

यदि आपके पास इस लोक पर्व या कला से जुड़ी कोई दुर्लभ रस्म, गीत या फोटो है तो हमारे साथ साझा करें।

जानकारी भेजें