विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व
"यादव (राउत) समाज द्वारा गौ-धन की सुरक्षा और भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में मनाया जाने वाला वीर रस और भक्ति का त्योहार।"
मातर के दिन गाए जाने वाले दोहे सामाजिक कुरीतियों पर तीखा व्यंग्य, वीर गाथा और श्रीकृष्ण की लीलाओं का अद्भुत संयोजन होते हैं। पूरा गांव इन दोहों को सुनने उमड़ता है।
प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण
- खोंड देव (काष्ठ प्रतिमा) की विशेष पूजा
- दोहे (दोहावली) का ओजस्वी व वीर रस वाचन
- पारंपरिक लाठी व ढाल चालन के साहसिक करतब
- गोधन को सुहाई (पलाश व सन की माला) पहनाना
पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया
शाम को गांव के मुख्य चौराहे पर खोंड देवता की स्थापना कर पूजा की जाती है। इसके बाद सभी यादव बंधु पारंपरिक वेशभूषा में मोरपंख और लाठियां लेकर नृत्य और शौर्य प्रदर्शन करते हैं।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के प्रकोप से गोकुल वासियों और गायों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने की पौराणिक घटना से यह पर्व जुड़ा है।
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33 जिला दर्शन
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