विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व
"बाबा गुरु घासीदास जी के सत्य, अहिंसा और मानव समरसता ("मनखे-मनखे एक समान") के सिद्धांतों को समर्पित सतनामियों का द्रुत गति का हैरतअंगेज नृत्य।"
दिवंगत पद्मश्री देवदास बंजारे ने पंथी नृत्य को पेरिस, लंदन, टोक्यो सहित विश्वभर के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रदर्शित कर अमर बना दिया। यह नृत्य आध्यात्मिक ऊर्जा का विस्फोट है।
प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण
- पद्मश्री देवदास बंजारे द्वारा 60+ देशों में अंतरराष्ट्रीय ख्याति
- पिरामिड निर्माण व शारीरिक संतुलन के विस्मयकारी करतब
- मांदर व झांझ की तीव्र गति व द्रुत पद संचालन
- सफेद धोती-बंडी, साफा व घुंघरू की वेशभूषा
पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया
जैतखाम की परिक्रमा करते हुए नर्तक पहले धीमी गति से गुरु महिमा का गायन शुरू करते हैं। धीरे-धीरे झांझ और मांदर की गति पराकाष्ठा पर पहुंचती है और नर्तक तीन-तीन मंजिला पिरामिड बना लेते हैं।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि
18वीं-19वीं सदी में गुरु घासीदास जी द्वारा शुरू किए गए सतनाम आंदोलन की सामाजिक चेतना को गीतों और शारीरिक साधना के रूप में पंथी नृत्य ने पिरोया।
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33 जिला दर्शन
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