मध्य भारत का सबसे बड़ा मेला प्रसिद्ध सांस्कृतिक मेले एवं महोत्सव

राजिम कुंभ कल्प (त्रिवेणी संगम का महाकुंभ)

Rajim Kumbh Kalp Mahotsav

विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व

"महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर 15 दिनों तक चलने वाला मध्य भारत का सबसे विशाल धार्मिक व सांस्कृतिक समागम। इसे छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है।"

राजिम कुंभ केवल आस्था का केंद्र नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों, साहित्यकारों और लोक संस्कृति के प्रदर्शन का सबसे बड़ा मंच है।

प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण

  • त्रिवेणी संगम पर तीन शाही स्नान (माघ पूर्णिमा, जानकी जयंती, महाशिवरात्रि)
  • देशभर के प्रख्यात साधु-संतों और नागा अखाड़ों का समागम
  • भगवान श्री राजीव लोचन एवं कुलेश्वर महादेव का दर्शन
  • भव्य गंगा आरती, लेजर शो और राष्ट्रीय सांस्कृतिक संध्याएं

पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया

माघ पूर्णिमा को ध्वजारोहण और प्रथम शाही स्नान से मेला शुरू होता है। महाशिवरात्रि की रात विशाल दीपदान और विशेष आरती संपन्न होती है।

ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि

राजिम प्राचीन काल से पंचकोशी यात्रा का केंद्र रहा है। कलचुरी और नलवंशी राजाओं के काल से ही संगम पर माघी मेले की परंपरा चली आ रही है।

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