विस्तृत परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व
"यादव (राउत) समाज द्वारा पारंपरिक वेशभूषा, मोरपंख की पगड़ी और हाथों में सजी लाठियां लेकर किया जाने वाला छत्तीसगढ़ का सर्वाधिक ओजस्वी और रंगारंग लोक नृत्य।"
बिलासपुर के लाल बहादुर शास्त्री मैदान में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला राउत नाचा महोत्सव पूरे देश में प्रसिद्ध है, जहां 50 से अधिक दल अपने अद्भुत हुनर का प्रदर्शन करते हैं।
प्रमुख विशेषताएं एवं मुख्य आकर्षण
- बिलासपुर का ऐतिहासिक राष्ट्रीय राउत नाचा महोत्सव (1978 से निरंतर)
- शौर्य, वीरता, दोहा वाचन और लाठी चालन कला
- कौड़ियों व गोटा से जड़ी रंग-बिरंगी पोशाक व मोरपंख मुकुट
- गुदुम, नगाड़ा, मोहरी और डफली की कर्णप्रिय धुन
पारंपरिक विधि-विधान, रस्में एवं प्रक्रिया
नर्तक टोलियों में बंटकर घर-घर जाते हैं, गृहस्वामी को लाठी के घेरे में लेकर आशीष देते हैं और समाज सुधार के दोहे गाते हैं। बदले में उन्हें सम्मान व भेंट दी जाती है।
ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि
कहा जाता है कि कंस वध के बाद मथुरा में यादवों ने जो विजय उल्लास मनाया था, उसी परंपरा को छत्तीसगढ़ में राउत नाचा के रूप में संजोया गया है।
अन्य संबंधित लोक धरोहर
33 जिला दर्शन
छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले का इतिहास, संस्कृति और पर्यटन विवरण देखें।
क्या आप इसके बारे में और जानते हैं?
यदि आपके पास इस लोक पर्व या कला से जुड़ी कोई दुर्लभ रस्म, गीत या फोटो है तो हमारे साथ साझा करें।
जानकारी भेजें