जिला परिचय एवं संक्षिप्त इतिहास
दंतेवाड़ा का नाम मां दंतेश्वरी के नाम पर पड़ा है जो बस्तर अंचल की अधिष्ठात्री देवी हैं। बैलाडीला की पहाड़ियों में एशिया का सबसे शुद्ध और उच्च कोटि का हेमेटाइट लौह अयस्क पाया जाता है जिसे विशाखापट्टनम बंदरगाह से जापान तक निर्यात किया जाता है।
प्रमुख पर्यटन एवं दर्शनीय स्थल
दंतेवाड़ा जिले के सुप्रसिद्ध प्राकृतिक झरने, प्राचीन मंदिर, जलप्रपात, राष्ट्रीय उद्यान एवं ऐतिहासिक स्मारक:
मां दंतेश्वरी मंदिर (शंखिनी-डंकिनी संगम)
दंतेवाड़ाबारसूर (बत्तीस मंदिर
दंतेवाड़ामामा-भांजा मंदिर
दंतेवाड़ाविशाल गणेश प्रतिमा)
दंतेवाड़ाबैलाडीला डिपॉजिट-14 (आकाश नगर)
दंतेवाड़ाफूलपाड़ जलप्रपात
दंतेवाड़ादंतेवाड़ा जिले की जनपद पंचायतें
कुल 4 जनपद पंचायतेंदंतेवाड़ा जिले के प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी जनपद पंचायतें एवं उनके ग्राम पंचायत व आश्रित ग्रामों का विवरण:
जनपद पंचायत दंतेवाड़ा
जनपद पंचायत गीदम
जनपद पंचायत कटेकेल्याण
जनपद पंचायत कुआकोंडा
प्रमुख नदियां एवं भौगोलिक परिदृश्य
शंखिनी, डंकिनी, इंद्रावती
उच्च कोटि का लौह अयस्क (Bailadila Iron Ore), टिन अयस्क (Cassiterite)
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