जिला परिचय एवं संक्षिप्त इतिहास
खैरागढ़ भारत में संगीत, नृत्य और ललित कलाओं का सिरमौर नगर है। राजा बीरेंद्र बहादुर सिंह ने 1956 में अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा की स्मृति में अपने पूरे राजमहल को संगीत विश्वविद्यालय के रूप में दान कर दिया था।
प्रमुख पर्यटन एवं दर्शनीय स्थल
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के सुप्रसिद्ध प्राकृतिक झरने, प्राचीन मंदिर, जलप्रपात, राष्ट्रीय उद्यान एवं ऐतिहासिक स्मारक:
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय परिसर व कला वीथिका
खैरागढ़-छुईखदान-गंडईघटियारी शिव मंदिर (11वीं सदी)
खैरागढ़-छुईखदान-गंडईनर्मदा मंदिर (छुईखदान)
खैरागढ़-छुईखदान-गंडईमांडू महल (सीमा)
खैरागढ़-छुईखदान-गंडईअमलीडीह वॉटरफॉल
खैरागढ़-छुईखदान-गंडईखैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की जनपद पंचायतें
कुल 2 जनपद पंचायतेंखैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के प्रशासनिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी जनपद पंचायतें एवं उनके ग्राम पंचायत व आश्रित ग्रामों का विवरण:
प्रमुख नदियां एवं भौगोलिक परिदृश्य
आमनेर, पिपरिया, मुस्कान (त्रिवेणी संगम)
छुई मिट्टी (White Clay), चूना पत्थर
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