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स्थापत्य का स्वर्णकाल • प्रथम शताब्दी ई. से 10वीं शताब्दी ई.

प्राचीन क्षेत्रीय राजवंश (सातवाहन, नल, शरभपुरीय, पाण्डु/सोमवंश)

मौर्य एवं सातवाहन काल के उपरांत छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय राजवंशों का अभूतपूर्व विकास हुआ। शरभपुरीय और सिरपुर के पाण्डुवंश के शासन में स्थापत्य कला, ईंटों के मंदिर और बौद्ध-वैष्णव समन्वय का स्वर्णिम युग आया।

ऐतिहासिक कालखंड

8 अध्याय
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प्रथम शताब्दी ई. से 10वीं शताब्दी ई.

प्राचीन क्षेत्रीय राजवंश (सातवाहन, नल, शरभपुरीय, पाण्डु/सोमवंश)

Ancient Regional Dynasties & Sirpur Golden Era

प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं एवं संदर्भ

सातवाहन वंश: राजा अपिलक का तांबे का दुर्लभ सिक्का बालपुर (जांजगीर) से मिला। काष्ठा स्तंभ लेख किरारी (जांजगीर) से प्राप्त।
मेघ वंश / कुषाण काल: कुलिया (दुर्ग) से कुषाण व तांबे के सिक्के मिले।
वाकाटक वंश: राजा प्रवरसेन प्रथम एवं नरेंद्रसेन। बस्तर के नल राजाओं के साथ भीषण संघर्ष चला।
नल वंश (बस्तर अंचल): राजधानी पुष्करी (कोरापुट/भोपालपट्टनम)। प्रमुख शासक वराहराज, भवदत्त वर्मन और विलासतुंग (जिन्होंने 740 ई. में राजिम का भव्य राजीवलोचन विष्णु मंदिर बनवाया)।
शरभपुरीय वंश: संस्थापक शरभराज। राजधानी शरभपुर व प्रसन्नपुर (मल्हार)। प्रमुख शासक प्रसन्नमात्र, जयराज, सुदेवराज। गजलक्ष्मी अंकित स्वर्ण सिक्के चलाए।
पाण्डु / सोमवंश (सिरपुर): महाशिवगुप्त बालार्जुन का 60 वर्षों का शासन छत्तीसगढ़ का "स्थापत्य का स्वर्णकाल" कहलाता है।
सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर: महारानी वासटा देवी ने अपने पति हर्षगुप्त की स्मृति में लाल ईंटों से नागर शैली में बनवाया (विष्णु मंदिर)।
ह्वेनसांग का सिरपुर आगमन: चीनी यात्री ह्वेनसांग 639 ई. में महाशिवगुप्त बालार्जुन के काल में सिरपुर आया और यात्रा वृतांत "सी-यू-की" में इस क्षेत्र को "किआ-सो-लो" लिखा।

प्रमुख ऐतिहासिक स्थल एवं पुरातात्विक साक्ष्य

लक्ष्मण मंदिर, सिरपुर

महासमुंद

7वीं शताब्दी का लाल ईंटों से निर्मित भव्य मंदिर, भारतीय पुरातत्व का अद्भुत रत्न

राजीवलोचन मंदिर, राजिम

गरियाबंद

नलवंशी शासक विलासतुंग द्वारा 8वीं सदी में निर्मित पंचायतन शैली का मंदिर

मल्हार (प्रसन्नपुर)

बिलासपुर

शरभपुरीय राजा प्रसन्नमात्र द्वारा निडिला नदी तट पर बसाई गई ऐतिहासिक नगरी, पातालेश्वर मंदिर

तालागांव (देवरानी-जेठानी मंदिर)

बिलासपुर

5वीं सदी का सबसे प्राचीन मंदिर व रुद्रशिव की 11 जीवों के अंगों से निर्मित विलक्षण प्रतिमा

CGPSC / Vyapam परीक्षा उपयोगी स्मरणीय तथ्य

  • सिरपुर को "मोक्षनगरी" और बौद्ध धर्म का अंतरराष्ट्रीय केंद्र माना जाता था, जहां 10,000 बौद्ध भिक्षु रहते थे।
  • समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण रचित) में दक्षिण कोशल के राजा महेंद्र और महाकांतार के राजा व्याघ्रराज को पराजित करने का उल्लेख है।
  • तालागांव का देवरानी-जेठानी मंदिर छत्तीसगढ़ का सबसे प्राचीन विद्यमान मंदिर है।

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