प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं एवं संदर्भ
अन्नमदेव (1324 ई.): काकतीय वंश संस्थापक। शंखिनी-डंकिनी नदी संगम पर दंतेवाड़ा में दंतेश्वरी मंदिर की स्थापना की।
पुरुषोत्तम देव: जगन्नाथपुरी के दर्शन के बाद "रथपति" की उपाधि प्राप्त की और बस्तर में विश्व प्रसिद्ध "गोंचा पर्व" (रथ यात्रा) प्रारंभ किया।
दलपत देव: राजधानी मंधौता से जगदलपुर स्थानांतरित की (जगदलपुर को "चौराहों का शहर" कहा जाता है)।
प्रवीर चंद्र भंजदेव: बस्तर के अंतिम लोकप्रिय महाराजा (1936-1961), जिन्होंने आदिवासियों के अधिकारों के लिए प्राण न्योछावर किए।
हलबा विद्रोह (1774-77): अजमेर सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का प्रथम सशस्त्र क्रांति विद्रोह।
परलकोट विद्रोह (1825): गेंदसिंह के नेतृत्व में। प्रतीक: धावक। गेंदसिंह 20 जनवरी 1825 को फांसी पर चढ़कर बस्तर के प्रथम शहीद बने।
तारापुर विद्रोह (1842-54): दलगंजन सिंह के नेतृत्व में दीवान जगबंधु के कर शोषण के विरुद्ध।
मेरिया विद्रोह (1842-63): हिड़मा मांझी के नेतृत्व में ब्रिटिश अधिकारी कैम्पबेल के विरुद्ध (धार्मिक आस्था रक्षा)।
लिंगागिरी विद्रोह (1856-57): धुर्वाराम माड़िया के नेतृत्व में, जिसे "बस्तर का मुक्ति संग्राम" कहा जाता है। 5 मार्च 1856 को फांसी।
कोई विद्रोह (1859): नांगुल दोरला के नेतृत्व में। ब्रिटिश साल वृक्ष कटाई के विरोध में नारा- "एक साल वृक्ष के पीछे एक सिर" (भारत का प्रथम पर्यावरण विद्रोह)।
मुरिया विद्रोह (1876): झाड़ा सिरहा के नेतृत्व में। प्रतीक: आम वृक्ष की टहनी। राजा भैरमदेव का घेराव।
भूमकाल विद्रोह (1910): वीर गुंडाधूर (नेतानार) व लाल कालेंद्र सिंह के नेतृत्व में। प्रतीक: लाल मिर्च, मिट्टी का ढेला, आम की टहनी। अंग्रेजों की नाक में दम करने वाला भीषणतम विद्रोह।
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