फसल का परिचय एवं छत्तीसगढ़ में महत्व
"धान की कटाई के बाद मैदानी जिलों में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली रबी फसल। बेमेतरा और कबीरधाम जिले गुणवत्तापूर्ण गेहूं उत्पादन में अग्रणी हैं।"
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा रबी में धान के बदले गेहूं, चना और दलहन-तिलहन बोने पर विशेष बीज मिनीकिट एवं अनुदान सहायता दी जाती है जिससे भूजल स्तर की रक्षा होती है।
प्रमुख विशेषताएं एवं आर्थिक लाभ
- धान के फसल चक्र परिवर्तन (Crop Diversification) हेतु सर्वोत्तम
- कम पानी में स्प्रिंकलर सिंचाई से भरपूर उत्पादन
- आटा मिलों एवं बिस्कुट उद्योगों में निरंतर मांग
- शरबती व लोक-1 किस्मों को मंडियों में प्रीमियम भाव
अनुशंसित उन्नत किस्में (IGKV रायपुर)
प्रमुख किस्में: सुजाता, लोक-1, जेडब्ल्यू 3288, पूसा तेजस (HI 8759), कनक
कृषि तकनीकी, बुआई एवं कीट प्रबंधन सलाह
गेहूं की बुआई नवंबर के प्रथम पखवाड़े में कर लेनी चाहिए। पहली सिंचाई सीआरआई (CRI) अवस्था (बुआई के 20-25 दिन बाद) पर अत्यंत आवश्यक है। कुल 4-5 हल्की सिंचाइयों में अच्छी पैदावार मिलती है।
प्रमुख कृषि उपज मंडियां एवं आवक
सर्वोत्तम भाव वाली मंडियां: भाटापारा, बेमेतरा, कवर्धा, राजनांदगांव, बिलासपुर
अन्य संबंधित फसलें
33 जिला दर्शन
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