फसल का परिचय एवं छत्तीसगढ़ में महत्व
"कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर बस्तर का पारंपरिक अनाज जिसे स्थानीय बोली में "मड़िया" कहा जाता है। बच्चों व माताओं में कुपोषण दूर करने का अचूक साधन।"
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों व गर्भवती महिलाओं को रागी के लड्डू व माल्ट वितरित किए जा रहे हैं, जिससे आदिवासी अंचलों में एनीमिया और कुपोषण दर में भारी गिरावट आई है।
प्रमुख विशेषताएं एवं आर्थिक लाभ
- दूध से 3 गुना अधिक प्राकृतिक कैल्शियम की प्रचुरता
- बस्तर के पारंपरिक "पेज" (मड़िया पेज) का प्रमुख घटक
- रागी हलवा, लड्डू, बिस्कुट और इडली के रूप में पोषण आहार
- समर्थन मूल्य ₹4,290 प्रति क्विंटल पर सरकारी खरीदी
अनुशंसित उन्नत किस्में (IGKV रायपुर)
प्रमुख किस्में: छत्तीसगढ़ रागी-1, जीपीयू 28, वीएल 149, भैरबी
कृषि तकनीकी, बुआई एवं कीट प्रबंधन सलाह
रागी की नर्सरी तैयार कर रोपाई करने से प्रति एकड़ 15-18 क्विंटल तक पैदावार मिलती है। सूखा सहन करने में यह फसल अद्वितीय है।
प्रमुख कृषि उपज मंडियां एवं आवक
सर्वोत्तम भाव वाली मंडियां: जगदलपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर, जशपुर
अन्य संबंधित फसलें
33 जिला दर्शन
जिलेवार प्रमुख फसलों और कृषि सांख्यिकी का अवलोकन करें।
किसान कॉल सेंटर (टोल फ्री)
कृषि वैज्ञानिकों से सीधे फसल, खाद एवं कीट नियंत्रण की सलाह प्राप्त करें।
1800-180-1551