फसल का परिचय एवं छत्तीसगढ़ में महत्व
"मध्य प्रदेश की सीमा से लगे राजनांदगांव और कबीरधाम जिलों की प्रमुख नकदी तिलहन फसल। तेल एवं उच्च प्रोटीन पशु आहार (डीओसी) का प्रमुख स्रोत।"
राजनांदगांव और कबीरधाम में कई बड़े सोयाबीन तेल संयंत्र कार्यरत हैं जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर तुरंत भुगतान और पारदर्शी तुलाई मिलती है।
प्रमुख विशेषताएं एवं आर्थिक लाभ
- मात्र 85-90 दिन में पककर तैयार होने वाली अल्पकालिक फसल
- सोयाबीन के बाद रबी में चना या गेहूं की समय पर बुआई संभव
- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन प्लांटों में हाथों-हाथ नकद बिक्री
- दलहनी फसल होने के कारण जमीन को उपजाऊ बनाती है
अनुशंसित उन्नत किस्में (IGKV रायपुर)
प्रमुख किस्में: जेएस 9560 (कम अवधि), जेएस 9305, जेएस 2029, एनआरसी 37
कृषि तकनीकी, बुआई एवं कीट प्रबंधन सलाह
बीज की गहराई 3-4 सेमी से अधिक न रखें। अधिक वर्षा की स्थिति में जल निकास हेतु रिज-एंड-फरो (Ridge & Furrow) विधि से बुआई सबसे उत्तम है।
प्रमुख कृषि उपज मंडियां एवं आवक
सर्वोत्तम भाव वाली मंडियां: राजनांदगांव, कवर्धा, बेमेतरा, मुंगेली
अन्य संबंधित फसलें
33 जिला दर्शन
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