फसल का परिचय एवं छत्तीसगढ़ में महत्व
"बिना जुताई और बिना किसी अतिरिक्त लागत के धान के खड़े खेत में छिड़ककर ली जाने वाली पारंपरिक उतेरा (Paira) दलहन फसल। भाजी और दाल दोनों का पौष्टिक स्रोत।"
पूर्व में पुराने तियोरा में ओडीएपी (ODAP) तत्व की अधिकता से लेथायरिज़्म का डर रहता था, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों ने "महातेवड़ा" और "प्रतीक" जैसी किस्में विकसित की हैं जो स्वास्थ्य के लिए 100% सुरक्षित और गुणकारी हैं।
प्रमुख विशेषताएं एवं आर्थिक लाभ
- शून्य जुताई एवं शून्य अतिरिक्त सिंचाई लागत
- तियोरा की भाजी (Leafy vegetable) सर्दियों में अत्यंत लोकप्रिय
- आईजीकेवी द्वारा विकसित कम टॉक्सिन वाली "प्रतीक" व "रतन" किस्में पूर्णतः सुरक्षित
- मृदा में प्रचुर जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण
अनुशंसित उन्नत किस्में (IGKV रायपुर)
प्रमुख किस्में: महातेवड़ा, प्रतीक, रतन (कम न्यूरोटॉक्सिन सुरक्षित किस्में)
कृषि तकनीकी, बुआई एवं कीट प्रबंधन सलाह
धान की कटाई से 10-15 दिन पूर्व जब खेत में केवल हल्की नमी हो, तब 35-40 किग्रा बीज प्रति एकड़ छिड़क दें। धान कटाई के बाद यह स्वतः तेजी से बढ़ता है।
प्रमुख कृषि उपज मंडियां एवं आवक
सर्वोत्तम भाव वाली मंडियां: रायपुर, भाटापारा, बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी
अन्य संबंधित फसलें
33 जिला दर्शन
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