छत्तीसगढ़ में गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा खत्म, उप मुख्यमंत्री की पहल पर बड़ा बदलाव, अब केवल यहां होगी सलामी
Publish: 25 December 2025, 3:51 am IST | Views: 64

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया है. अब प्रदेश में मंत्री, पुलिस अधिकारियों या अन्य सरकारी पदाधिकारियों को गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाएगा. यह बदलाव उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा की विशेष पहल किया गया है. हालांकि, सलामी व्यवस्था को केवल राष्ट्रीय और राजकीय आयोजनों तक सीमित रखा गया है.
इस फैसले से न केवल सरकारी खर्च कम होगा, बल्कि पदों के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूत माना जा रहा है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे ‘सादगीपूर्ण प्रशासन’ का प्रतीक बताया. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कैबिनेट मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दिलाई. उन्होंने कहा, “गार्ड ऑफ ऑनर का दुरुपयोग हो रहा था. यह परंपरा अब केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राष्ट्रीय समारोहों तक सीमित रहेगी. इससे हमारा प्रशासन जनकेंद्रित बनेगा.”
समय और पैसे की बचत
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की यह पहल राज्य के वित्तीय अनुशासन और सादगी को बढ़ावा देने वाली है. पिछले वर्षों में कई कार्यक्रमों में गार्ड ऑफ ऑनर के नाम पर लाखों रुपये खर्च होते थे, जो अब बचेंगे. पुलिस महानिदेशक ने आदेश जारी कर सभी जिलों को सूचित किया कि सलामी केवल संवैधानिक पदों या राष्ट्रीय आयोजनों में ही होगी.
जारी आदेश के तहत राज्य के भीतर सामान्य दौरों, आगमन-प्रस्थान एवं निरीक्षण के दौरान अब गृहमंत्री, समस्त मंत्रीगण, पुलिस महानिदेशक सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सलामी गारद (गार्ड ऑफ ऑनर) नहीं दिया जाएगा. जिला भ्रमण, दौरे या निरीक्षण के समय पूर्व में प्रचलित सलामी व्यवस्था को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है. इससे पुलिस का समय और ऊर्जा का प्रभावी उपयोग सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा जनसेवा के कार्यों में हो सकेगा.
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