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छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में बड़ा घोटाला: अभ्यर्थियों ने उठाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, मांग की निष्पक्ष जांच

Publish: 11 December 2025, 3:38 am IST | Views: Page View 222

छत्तीसगढ़ राज्य में हाल ही में पुलिस कांस्टेबल भर्ती के नतीजों ने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है। अभ्यर्थियों की ओर से उठाए गए गंभीर आरोपों ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोपों की बानगी इतनी गंभीर है कि इसने सरकार और प्रशासन के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

आरोपों का विस्तृत ब्योरा:

  1. फिजिकल टेस्ट में अवास्तविक अंक (100 में 100 नंबर): अभ्यर्थियों का आरोप है कि फिजिकल एंडियरेंस टेस्ट (PET) और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट में अनियमितताएं हुई हैं। कई उम्मीदवारों को 100 में से 100 अंक दिए गए, जो प्रायोगिक रूप से असंभव स्थिति मानी जा रही है। यह संकेत है कि बिना उचित परीक्षण के ही अंक प्रदान किए गए।
  2. कम कुल अंकों वालों का चयन: सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कुछ ऐसे उम्मीदवारों का चयन हो गया है, जिनके लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट को मिलाकर प्राप्त कुल अंक, चयन सीमा से कम हैं। यह सीधे-सीधे मेरिट के सिद्धांत का उल्लंघन है और संदेह पैदा करता है कि चयन मनमाने ढंग से किया गया है।
  3. एक ही आवेदन संख्या के कई चयनित उम्मीदवार: भर्ती की गड़बड़ी का एक और सबूत यह सामने आया है कि जिन उम्मीदवारों का चयन हुआ है, उनमें से कई लोगों की आवेदन संख्या एक ही है। यह तकनीकी त्रुटि से कहीं आगे की बात है और धांधली की ओर इशारा करती है।
  4. टाइप किया हुआ रिजल्ट, कम्प्यूटराइज्ड मेरिट नहीं: अभ्यर्थियों का दावा है कि जारी किया गया रिजल्ट कंप्यूटर द्वारा स्वचालित रूप से तैयार मेरिट लिस्ट नहीं है, बल्कि मनचाहे तरीके से टाइप करके बनाया गया दस्तावेज है। इससे पारदर्शिता का पूर्ण अभाव स्पष्ट होता है।
  5. श्रेणियों में खिलवाड़ (ST को SC में, OBC को ST में): आरक्षण नियमों के साथ भी खिलवाड़ के मामले सामने आए हैं। आरोप है कि एसटी (अनुसूचित जनजाति) श्रेणी के उम्मीदवारों को एससी (अनुसूचित जाति) की सूची में डाल दिया गया, और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के उम्मीदवारों को एसटी की सूची में दिखाया गया। इससे न सिर्फ आरक्षण नीति का मखौल उड़ा है, बल्कि वंचित वर्गों के अधिकारों का हनन हुआ है।
  6. पैसे के बल पर चयन का आरोप: घोटाले से पहले ही ऐसी खबरें प्रचलित थीं कि भारी रकम देकर चयन सुनिश्चित कराया जा रहा है। वर्तमान अनियमितताएं इन आरोपों को बल प्रदान करती प्रतीत होती हैं।

भविष्य की संभावित कार्यवाही और चिंताएं:

  1. हाई कोर्ट का रास्ता: अभ्यर्थियों और विपक्षी दलों द्वारा मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में ले जाए जाने की संभावना है। अदालत से भर्ती पर रोक लगाने और निष्पक्ष जांच के आदेश मिलने की उम्मीद है।
  2. लंबी कानूनी लड़ाई: इस मामले में जांच, आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी प्रक्रिया में काफी समय लग सकता है, जिससे सच्चे अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितता में फंस सकता है।
  3. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप: विपक्ष सरकार पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगा रहा है। सत्तारूढ़ दल को जवाबदेह ठहराया जा रहा है।
  4. अभ्यर्थियों की त्रासदी: इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा नुकसान ईमानदारी से तैयारी करने वाले युवाओं का हुआ है। जिन्होंने मेहनत से परीक्षा दी, वे हताश और निराश हैं। वहीं, आरोप है कि जिन्होंने पैसे दिए, उनके चयन से व्यवस्था पर अविश्वास बढ़ा है।

एक दुखद चक्र और समाधान का रास्ता:

अभ्यर्थियों और आम जनता में एक गहरी निराशा और भावना यह है कि यह एक सामान्य चक्र बन गया है: घोटाला होगा, मामला कोर्ट जाएगा, रोक लगेगी, जांच होगी, भर्ती रद्द होगी, और फिर कुछ समय बाद नई भर्ती में फिर घोटाला होगा। इस चक्र को तोड़ने के लिए जरूरी है:

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती घोटाला केवल एक भर्ती प्रक्रिया की विफलता नहीं है, बल्कि यह राज्य के युवाओं के सपनों और विश्वास के साथ खिलवाड़ है। इसने सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया में पनप रहे भ्रष्टाचार की एक कड़वी तस्वीर पेश की है। अब यह राज्य सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह त्वरित, पारदर्शी और न्यायसंगत कार्रवाई करके युवाओं का विश्वास बहाल करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए सख्त प्रणालीगत सुधार लागू करे।

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