छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के प्रमुख क्षेत्र और मामले
Publish: 27 November 2025, 3:43 am IST | Views: 61
- खनन घोटाले: छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। यहाँ कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों के आवंटन और दोहन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। कथित तौर पर नियमों को तोड़कर, पर्यावरणीय मंजूरी देकर,或 फिर राजस्व की हेराफेरी करके घोटाले किए जाते हैं।
- पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) घोटाला: राज्य में सब्सिडी वाले अनाज (चावल) के वितरण में भ्रष्टाचार के बड़े मामले सामने आए हैं। इसमें फर्जी राशन कार्ड, अनाज की ब्लैक मार्केटिंग, और लाभार्थियों तक सही मात्रा में अनाज न पहुँचना जैसे issues शामिल हैं।
- नक्सलवाद-भ्रष्टाचार नेक्सस: राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों (सड़क, भवन निर्माण) में घोटालों और ठेका घोटालों के आरोप लगते रहते हैं। आरोप है कि नक्सली विभिन्न परियोजनाओं में "कमीशन" लेते हैं और फंड का दुरुपयोग होता है।
- बोर्ड परीक्षा घोटाला: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं, जो शिक्षा तंत्र में गहरे भ्रष्टाचार को दर्शाते हैं।
- सरकारी नौकरियाँ और भर्ती: सरकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया में रिश्वतखोरी और पक्षपात के आरोप लगते रहते हैं।
- स्थानीय प्रशासन: जमीन के रजिस्ट्रेशन, municipality approvals, और पुलिस प्रशासन में भी भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं।
भ्रष्टाचार रोकथाम के उपाय और संस्थाएँ:
- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग: राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच के लिए जिम्मेदार प्रमुख एजेंसी है।
- विशेष न्यायालय: भ्रष्टाचार के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए बनाए गए हैं।
- ई-गवर्नेंस: कई सेवाओं को ऑनलाइन करके और पारदर्शिता लाकर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का प्रयास।
- नागरिक सतर्कता: आरटीआई (सूचना का अधिकार) का उपयोग करके नागरिक भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर कर रहे हैं।
हाल के घटनाक्रम:
राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के साथ ही सत्तारूढ़ दल अक्सर पिछली सरकारों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हैं और नए मामले दर्ज करते हैं। इसलिए, भ्रष्टाचार के मामले अक्सर राजनीतिक विवादों का केंद्र बने रहते हैं।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार एक जटिल समस्या है जो राज्य के विकास में एक बड़ी बाधा है। हालाँकि इसको रोकने के लिए कानूनी और प्रशासनिक ढाँचा मौजूद है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठते रहते हैं।
ध्यान दें: यह जानकारी सामान्य सूचना के आधार पर है और किसी विशिष्ट मामले का विवरण नहीं है। किसी खास मामले की जानकारी के लिए उससे संबंधित विश्वसनीय समाचार रिपोर्ट या आधिकारिक स्रोत देखे जा सकते हैं।
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