छत्तीसगढ़ सरकार की कृषि खरीदी: एक व्यापक विवरण
Publish: 11 October 2025, 3:15 am IST | Views: 135
छत्तीसगढ़, जिसे "धान का कटोरा" कहा जाता है, एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ दिलाने के लिए विभिन्न फसलों की खरीदी करती है। यह खरीदी मुख्यतः 'समर्थन मूल्य' पर की जाती है, ताकि किसानों को बाजार में होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
मुख्य रूप से यह खरीद प्रक्रिया राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED) और छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम जैसी एजेंसियों के माध्यम से संचालित की जाती है। आइए जानते हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार किन-किन मुख्य उत्पादों की खरीदी करती है।
खरीदी जाने वाली मुख्य फसलें एवं उत्पाद:
1. अनाज (Cereals):
- धान: यह राज्य की सबसे महत्वपूर्ण फसल है। सरकार बड़े पैमाने पर धान की खरीदी करती है, जिसे बाद में चावल के रूप में केंद्रीय पूल में भेजा जाता है।
- गेहूँ: रबी सीजन में गेहूँ की भी व्यापक खरीदारी की जाती है।
- मक्का: राज्य में मक्के की खेती भी बड़े स्तर पर होती है और सरकार इसकी खरीद करती है।
- ज्वार, बाजरा, कोदो-कुटकी, रागी: इन पारंपरिक मोटे अनाजों को भी समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है।
2. दलहन (Pulses):
- तुअर (अरहर): एक प्रमुख दलहन फसल जिसकी खरीद की जाती है।
- चना: रबी सीजन की प्रमुख दलहन फसल।
- मसूर, मटर, उड़द, मूंग, कुलथी: इन अन्य दलहनों को भी सरकारी खरीद योजना में शामिल किया गया है।
3. तिलहन (Oilseeds):
- सोयाबीन: राज्य में तेजी से बढ़ रही एक महत्वपूर्ण तिलहन फसल।
- मूंगफली, तिल, अलसी, सरसों: इन तिलहन फसलों की भी सरकार द्वारा खरीद की जाती है।
4. मसाले (Spices):
- धनिया, जीरा, सौंफ, अजवाईन, हल्दी, मिर्च, सोंठ (सूखा अदरक): राज्य में उगाए जाने वाले विभिन्न मसालों को भी समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है।
5. बागवानी उत्पाद (Horticulture Produce):
- फल: आम, केला, अमरूद, पपीता, नींबू वर्गीय फल (मोसम्बी, संतरा) आदि।
- सब्जियाँ: टमाटर, भिंडी, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, प्याज, आलू, हरी पत्तेदार सब्जियाँ आदि।
- इमली, आंवला, चिरौंजी: यह स्थानीय वनोपज और बागवानी उत्पाद भी खरीद के दायरे में आते हैं।
6. वनोपज (Forest Produce):
- महुआ के फूल, तेंदू पत्ता, हर्रा, बहेड़ा, गोंद, बांस, इमली: छत्तीसगढ़ सरकार वन धन योजना के तहत इन वनोपजों की खरीद करती है, जिससे आदिवासी और वनवासी समुदायों को सीधा लाभ मिलता है।
7. अन्य उत्पाद:
- गन्ना: चीनी मिलों के माध्यम से गन्ने की खरीद की जाती है।
- लहसुन, अदरक: इनकी भी खरीद की जाती है।
- रामदाना (अमरंथ), सन बीज: कुछ क्षेत्रों में इन विशेष फसलों को भी प्रोत्साहन दिया जाता है।
खरीदी की प्रक्रिया:
- किसानों को अपनी उपज राज्य द्वारा निर्दिष्ट प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों या खरीद केंद्रों पर बेचनी होती है।
- उत्पाद की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की जाँच की जाती है।
- खरीद के बाद किसानों के बैंक खातों में सीधे MSP के आधार पर भुगतान किया जाता है।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ सरकार की कृषि खरीद नीति का दायरा बहुत व्यापक है। यह नीति न केवल धान और गेहूँ जैसी परंपरागत फसलों तक सीमित है, बल्कि दलहन, तिलहन, मसाले, बागवानी उत्पाद और वनोपज को भी इसमें शामिल किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को एक सुरक्षित बाजार उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि करना और कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाना है। इस व्यापक खरीद व्यवस्था से छत्तीसगढ़ के लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
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