जिंदगी का पूरा पैमाना: 0 से 70 साल तक, इंसान क्या-क्या करता रहता है?
Publish: 09 December 2025, 4:06 am IST | Views: 66
ठीक है, यहाँ 0 से 70 वर्ष तक के मानव जीवन के विभिन्न चरणों में प्रमुख गतिविधियों एवं विकास के बिंदु दिए गए हैं:
0-2 वर्ष (शैशवावस्था)
- जन्म एवं शारीरिक अनुकूलन
- दूध पर निर्भरता, नींद का लंबा चक्र
- मुस्कुराना, आवाज़ें निकालना, बड़बड़ाना शुरू करना
- पलटना, बैठना, रेंगना, चलना सीखना
- माता-पिता/अभिभावकों के साथ गहन भावनात्मक बंधन
3-5 वर्ष (पूर्व-बाल्यावस्था)
- भाषा का तीव्र विकास, सवाल पूछना
- कल्पनाशील एवं समानांतर खेल खेलना
- शौचालय प्रशिक्षण पूर्ण होना
- प्रीस्कूल/आंगनवाड़ी में जाना, सामाजिकता की शुरुआत
- मोटर स्किल्स (दौड़ना, कूदना, पेंसिल पकड़ना) का विकास
6-12 वर्ष (बाल्यावस्था)
- प्राथमिक विद्यालय में औपचारिक शिक्षा की शुरुआत
- पढ़ने-लिखने और अंकगणित का आधार सीखना
- दोस्त बनाना, समूह में खेलना, सहयोग सीखना
- नैतिकता और नियमों की समझ विकसित होना
- कोई न कोई खेल या शौक (संगीत, कला) में रुचि लेना
13-19 वर्ष (किशोरावस्था)
- माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई
- तीव्र शारीरिक एवं हार्मोनल परिवर्तन (यौवनारंभ)
- आत्म-पहचान, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के संघर्ष का दौर
- करियर और उच्च शिक्षा के विकल्पों पर विचार
- मित्र मंडली का प्रभाव अधिक, रोमांटिक रुचि का विकास
20-29 वर्ष (युवावस्था - प्रारंभिक)
- कॉलेज/विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण पूरा करना
- पहली नौकरी में प्रवेश, आर्थिक स्वतंत्रता की शुरुआत
- करियर का पथ निर्धारित करना
- गंभीर रिश्ते, साथी चुनना एवं अक्सर विवाह
- स्वयं का घर बनाना या अलग रहना
30-39 वर्ष (युवावस्था - परिपक्व)
- करियर में स्थिरता एवं उन्नति
- परिवार शुरू करना (बच्चे का जन्म एवं पालन-पोषण)
- आर्थिक योजना (घर खरीदना, निवेश) पर ध्यान
- सामाजिक एवं पेशेवर नेटवर्क मजबूत करना
- जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियाँ (तनाव आदि)
40-49 वर्ष (मध्यावस्था - प्रारंभिक)
- करियर के शिखर पर पहुँचना या नेतृत्व की भूमिका
- * बच्चों की किशोरावस्था का सामना करना
- स्वास्थ्य पर ध्यान देना शुरू करना (व्यायाम, जांच)
- माता-पिता की बढ़ती उम्र और देखभाल की जिम्मेदारी
- जीवन के लक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन (मिड-लाइफ क्राइसिस)
50-59 वर्ष (मध्यावस्था - उत्तरार्द्ध)
- अनुभव के आधार पर विशेषज्ञ की भूमिका
- बच्चों का व्यस्क होकर घर छोड़ना (खाली घर का सिंड्रोम)
- सेवानिवृत्ति की तैयारी (वित्तीय योजना)
- स्वास्थ्य समस्याएं (उच्च रक्तचाप, मधुमेह आदि) प्रकट होना
- नए शौक, यात्रा या सामाजिक कार्यों में समय देना
60-69 वर्ष (वरिष्ठावस्था - प्रारंभिक, सेवानिवृत्ति का चरण)
- औपचारिक नौकरी से सेवानिवृत्ति
- दादा-दादी/नाना-नानी की भूमिका
- स्वास्थ्य प्रबंधन प्राथमिकता बनना
- जीवनभर की बचत और पेंशन पर निर्भरता
- समुदाय या धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी
- ज्ञान एवं अनुभव का समाज को हस्तांतरण (मार्गदर्शन)
70 वर्ष (और उसके बाद) (वरिष्ठावस्था)
- शारीरिक गतिविधियाँ सीमित होना, देखभाल की आवश्यकता बढ़ना
- जीवन की यादों, विरासत और आध्यात्मिक चिंतन पर ध्यान
- परिवार के साथ समय बिताना, पारिवारिक समारोहों में शामिल होना
- स्वास्थ्य समस्याओं का प्रबंधन (दवाएं, डॉक्टर के पास जाना)
- जीवन की उपलब्धियों का आनंद लेना और यथासंभव सक्रिय रहना
ध्यान दें: यह एक सामान्य रूपरेखा है। संस्कृति, भौगोलिक स्थिति, आर्थिक स्तर एवं व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार इनमें भिन्नता हो सकती है।
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