छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास अत्यंत गौरवशाली है। रायगढ़ के सिंघनपुर और कबरा पहाड़ में भारत के प्राचीनतम शैलचित्र मिले हैं। त्रेतायुग में यह क्षेत्र दंडकारण्य व दक्षिण कोशल के नाम से विख्यात था, जहां भगवान राम ने वनवास के 10 वर्ष व्यतीत किए।
भारत में शैलचित्रों की सबसे प्राचीनतम गुफा (पूर्व पाषाण काल)
मध्य व उत्तर पाषाण काल के गेरुए रंग के पशु-पक्षी व मानव चित्र
मवई नदी तट पर स्थित, राम वन गमन परिपथ का प्रथम पड़ाव
जलसेन तालाब के मध्य 126 खंभों पर स्थित विश्व प्रसिद्ध कौशल्या माता मंदिर
महानदी-शिवनाथ-जोंक त्रिवेणी संगम, माता शबरी की तपोभूमि
सीता बेंगरा (विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला) और जोगीमारा गुफा (कालिदास मेघदूत रचना स्थल)
छत्तीसगढ़ के राजकीय प्रतीक, भौगोलिक सीमाएं, 5 अपवाह तंत्र, खनिज संपदा, 33 जिले, जनजातियां एवं 100+ त्वरित वन-लाइनर फैक्ट्स।
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