फरा (Phara / Steamed Rice Dumplings)
छत्तीसगढ़ का सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध नाश्ता। पके हुए चावल या चावल के आटे को भाप (स्टीम) में पकाकर राई, तिल और हरी मिर्च से छौंक कर बनाया जाता है।
चीला (Chhattisgarhi Rice Cheela)
चावल के आटे का पतला, कुरकुरा और स्वादिष्ट नमकीन डोसा/क्रेप। हर छत्तीसगढ़ी घर के नाश्ते की पहली पहचान और बच्चों से बुजुर्गों का पसंदीदा भोजन।
बोरे-बासी (Bore Baasi - CG Superfood)
छत्तीसगढ़ का पारंपरिक अमृत तुल्य भोजन। रात के पके चावल को पानी में भिगोकर रातभर किण्वित (ferment) किया जाता है। 1 मई को पूरे राज्य में "बोरे बासी तिहार" मनाया जाता है।
अंगाकर रोटी (Angakar Roti)
पलाश, महुआ या केले के पत्तों में लपेटकर लकड़ी या कंडे के दहकते अंगारों (अंगार) पर धीमी आंच में सेकी जाने वाली सौंधी खुशबूदार पारंपरिक मोटी रोटी।
चौसेला (Chausela / Rice Poori)
चावल के आटे से बनने वाली फूली-फूली, कुरकुरी और सुनहरी पूड़ी। त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर हर घर में बनाई जाने वाली पारंपरिक रोटी।
मुठिया (Muthia)
चावल के आटे, मेथी व मसालों को हाथों की मुट्ठी से दबाकर भाप में पकाया जाने वाला अत्यंत पौष्टिक और हल्का पारंपरिक स्नैक।
कर्मत्ता भाजी (Karmatta Bhaji)
छत्तीसगढ़ की सबसे लोकप्रिय जल-भाजी। तालाबों व मेड़ों पर उगने वाली यह भाजी चना दाल या आलू के साथ पकाई जाती है और बोरे-बासी के साथ अनिवार्य रूप से खाई जाती है।
बोहार भाजी (Bohar Bhaji - जंगल का अनोखा स्वाद)
छत्तीसगढ़ की सबसे दुर्लभ, महंगी और राजसी भाजी। यह जमीन पर नहीं बल्कि बोहार के ऊंचे पेड़ों पर वसंत ऋतु में आने वाली कोमल कलियों और पत्तों से बनाई जाती है।
लाल भाजी व चेच भाजी (Lal & Chech Bhaji)
छत्तीसगढ़ के हर खेत-खलिहान में लहलहाने वाली लाल रंग की चौलाई भाजी और चेच भाजी। लहसुन और मिर्च के छौंक के साथ इसका खट्टा-मीठा स्वाद अद्वितीय होता है।
कांदा भाजी व चरोटा भाजी (Kanda & Charota Bhaji)
शकरकंद के कोमल पत्तों (कांदा भाजी) तथा वर्षा ऋतु में स्वतः उगने वाले चरोटा के पत्तों से तैयार पारंपरिक देशी साग, जो अपने औषधीय गुणों के लिए विख्यात है।
दुबकी कढ़ी (Dubki Kadhi)
छत्तीसगढ़ की एक अनोखी कढ़ी जिसमें उड़द दाल के पेस्ट की छोटी-छोटी बड़ियों को बिना तले सीधे उबलती हुई छाछ/कढ़ी में डुबोकर (स्टीम देकर) पकाया जाता है।
रखिया बड़ी की सब्जी (Rakhia Badi Curry)
रखिया (पेठा कद्दू) और उड़द दाल के पेस्ट को धूप में सुखाकर सालभर के लिए संजोई जाने वाली सुगंधित बड़ी। आलू या टमाटर के साथ इसकी रसेदार सब्जी का स्वाद लाजवाब होता है।
उड़द दाल का बड़ा / बरा (Urad Dal Bada)
धुली उड़द दाल को सिलबट्टे पर पीसकर, फेंटकर बनाए जाने वाले गोल-गोल छेद वाले सुनहरे और फूले-फूले बड़े। हर छत्तीसगढ़ी शादी, पितर और पर्व का अनिवार्य व्यंजन।
ठेठरी (Thethari - Crispy Besan Rings)
बेसन, अजवाइन और तेल के मोयन से गूंथकर बनाई जाने वाली छल्लेदार, मुड़ी हुई बेहद कुरकुरी नमकीन। तीजा और पोरा तिहार में खुरमी के साथ यह हर घर में बनाई जाती है।
खुरमी (Khurmi - Traditional Sweet Crunchy)
गेहूं और चावल के आटे में गुड़ की चाशनी, सफेद तिल और घी का मोयन देकर गढ़ी जाने वाली खस्ता, मीठी और कुरकुरी पारंपरिक टिकिया। पोरा-तीजा पर्व की सबसे बड़ी मिठास।
देहरौरी (Dehrori - CG का शाही रसगुल्ला)
दरदरे भीगे चावल और खट्टे दही के घोल से तैयार, देसी घी में तली और इलायची-केसर युक्त गाढ़ी चाशनी में डूबी हुई छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध शाही मिठाई। इसे छत्तीसगढ़ का रसगुल्ला भी कहते हैं।
तसमई (Tasmai - सुगंधित चावल की पारंपरिक खीर)
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध सुगंधित दुबराज या जीराफूल चावल, गाढ़े गाय के दूध और गुड़ अथवा खांडसारी से धीमी आंच में पकाकर तैयार की जाने वाली अत्यंत सुवासित और मलाईदार खीर।
अइरसा / अनरसा (Airsa)
तीन दिनों तक पानी में भिगोए गए चावल के आटे और गुड़ की चाशनी को मिलाकर, ऊपर से सफेद तिल लपेटकर धीमी आंच में तली जाने वाली कुरकुरी व जालीदार मिठाई।
चापड़ा चटनी (Chaprah Chutney - GI Tag प्राप्त)
बस्तर के आदिवासी अंचल की विश्व विख्यात लाल चींटी (वीवर आंट) और उनके अंडों से तैयार तीखी-खट्टी चटनी। इसे भारत सरकार द्वारा भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया गया है।
मड़िया पेज (Madiya Page / Ragi Malt Soup)
मड़िया (रागी / फिंगर मिलेट) के आटे और पके चावल के मांड से तैयार किया जाने वाला बस्तर का अत्यंत पौष्टिक, शीतल और ऊर्जावान पारंपरिक सूप/पेय।
बांस करील / बांस पिहिका (Bamboo Shoot Curry)
वर्षा ऋतु में बांस के नए निकलने वाले कोमल अंकुरों (करील) से बनाई जाने वाली रसेदार या सूखी सब्जी। बस्तर और सरगुजा के वनांचलों का अद्वितीय मौसमी व्यंजन।
महुआ लाटा (Mahua Laata)
सूखे महुआ के फूलों को कूटकर, भुने हुए तिल्ली या अलसी के साथ सिलबट्टे पर गूंथकर तैयार किया जाने वाला पारंपरिक मीठा व ऊर्जावान आदिवासी पकवान।
सलोनी / खुरमा (Saloni / CG Namkeen)
मैदे या गेहूं के आटे में अजवाइन, कलौंजी और मोयन मिलाकर हीरे (डायमंड) के आकार में काटकर तली जाने वाली बेहद कुरकुरी नमकीन। हर त्योहार के नाश्ते की थाली में मौजूद।
कारी लड्डू (Kari Laddu)
बेसन की मोटी सेव (कारी) को तलकर गाढ़ी गुड़ की चाशनी में पागकर (मिलाकर) बनाए जाने वाले बड़े-बड़े पारंपरिक लड्डू। हर गांव और मेले की पहचान।
सिलबट्टा टमाटर-मिर्च चटनी (Desi Silbatta Chutney)
अंगारों पर भुने देसी टमाटर, लहसुन, तीखी हरी मिर्च और ताजे हरे धनिए को पारंपरिक सिलबट्टे पर पीसकर बनाई जाने वाली चटनी, जिसके बिना फरा, चीला और अंगाकर रोटी का स्वाद अधूरा है।
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बोरे-बासी (Bore Baasi) : स्वाद, सेहत और स्वाभिमान का प्रतीक
छत्तीसगढ़ में रात के पके भात (चावल) को साफ पानी में भिगोकर प्राकृतिक रूप से किण्वित (ferment) कर सुबह गोंदली (प्याज), हरी मिर्च, आम के अचार और कर्मत्ता या लाल भाजी के साथ खाना सदियों पुरानी परंपरा है। यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़िया संस्कृति की पहचान है।
पारंपरिक बोरे-बासी थाली
गढ़कलेवा केंद्र
समस्त 33 जिलों मेंगढ़कलेवा (Gadhkalewa) : जहां मिलता है छत्तीसगढ़ी स्वाद का असली आनंद
छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में 'गढ़कलेवा' केंद्रों की स्थापना की गई है। यहां छत्तीसगढ़ी महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा पारंपरिक माहौल में, बिना मिलावट, शुद्ध देशी तरीके से फरा, चीला, अंगाकर रोटी, ठेठरी, खुरमी, देहरौरी और गरम-गरम व्यंजन परोसे जाते हैं।
छत्तीसगढ़ की 36+ प्रसिद्ध भाजियों का संसार
छत्तीसगढ़ को "भाजियों का प्रदेश" कहा जाता है — जानें मौसमी एवं औषधीय हरी भाजियां
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